मैं बुद्धि विवेक के साथ निवास करता हूं, और मजाकिया आविष्कारों का ज्ञान प्राप्त करें (कहावत का खेल 8:12)
वे, जो वचन ग्रहण करेंगे वे ज्ञान प्राप्त करेंगे और बुद्धिमान बनेंगे. यीशु, शब्द, उन्हीं में रहता है, जो वचन को ग्रहण करते हैं और स्वीकार करते हैं, और शब्द में चलो.
बुद्धि दो प्रकार की होती है: परमेश्वर की बुद्धि और इस संसार की बुद्धि. ये दोनों प्रकार की बुद्धि एक साथ नहीं चल सकतीं. भगवान कहते हैं, कि इस संसार की बुद्धि उसके लिये मूर्खता है.
क्योंकि इस जगत की बुद्धि परमेश्वर की दृष्टि में मूर्खता है. इसके लिए लिखा है, वह बुद्धिमानों को उन्हीं की चतुराई में फंसा लेता है. और फिर, प्रभु बुद्धिमानों के विचारों को जानता है, कि वे व्यर्थ हैं. यीशु उन लोगों में रहते हैं जिनके पास परमेश्वर की बुद्धि है, और उसमें चलो (1सह 3:19-20)
वह बिल्कुल जानता है, जो विवेकशील है और जिस में वह रह सकता है. क्योंकि, वह विचित्र आविष्कारों का ज्ञान प्राप्त करता है. वह मनुष्य के हृदय के विचारों को जानता है (ल्यूक 24:38). वह हर विचार को जानता है, मनुष्य का हर आविष्कार. परमेश्वर सब कुछ देखता है, उसके लिए कुछ भी छिपा नहीं है.
'पृथ्वी का नमक बनो’


