तुम कब तक सोओगे?, हे आलसी!? तुम कब नींद से उठोगे? (कहावत का खेल 6:9)
ऐसा लगता है जैसे अधिकांश ईसाई सो रहे हैं और सोना नहीं चाहते जागो. दुर्भाग्य से, बहुत से विश्वासी आलसी के समान हैं. वे चमत्कारों के लिए प्रार्थना करते हैं, चमत्कार, और जीत, क्योंकि वे अपने जीवन में विजय का अनुभव करना चाहते हैं. लेकिन जैसे ही विरोध आता है, और विजय प्राप्त करने का अवसर आता है, वे कुछ नहीं करते और सोते रहते हैं.
सुस्त
वे अपनी परिस्थितियों और परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी होने देते हैं और अपने जीवन पर नियंत्रण कर लेते हैं. वे अपने आप में डूब जाते हैं स्वंय पर दया, स्वयं को खेद महसूस हो रहा है, और बड़बड़ाने लगते हैं और अपनी परिस्थितियों के बारे में दूसरों से शिकायत करने लगते हैं. उठने और परमेश्वर के वचन को लेने के बजाय और उन परिस्थितियों पर नियंत्रण रखना शुरू करें.
शैतान दहाड़ते हुए सिंह के समान चलता है, इस खोज में है कि वह किसे निगल जाए. और ईमानवाले ऊंघते और सोते रहते हैं. बहुत से लोग यह नहीं देखते कि शैतान क्या कर रहा है. वे उसे नहीं पहचानते, न ही उसके काम, और इसलिए वह कई विश्वासियों के जीवन को चुराने और नष्ट करने में सक्षम है.
इसलिए, यह जागने और जागने का समय है! यह समय है, जो आप जानते हैं जो आप हैं यीशु मसीह में और तुम्हें उसमें क्या अधिकार दिया गया है.
जागो और परमेश्वर का वचन खोलो! खोजिए कि उसने आपको क्या दिया है, और उसमें चलने लगे, ताकि तुम आलसी के स्थान पर जयवन्त बनो.
'पृथ्वी का नमक बनो’


