नीतिवचन में 9:6 वचन हमें मूर्खों को त्यागने और जीने तथा समझ के मार्ग पर चलने के लिए कहता है. इस संसार में दो प्रकार की बुद्धि होती है; परमेश्वर की बुद्धि और संसार की बुद्धि. परमेश्वर का ज्ञान आत्मा का ज्ञान है और संसार का ज्ञान शरीर का शारीरिक ज्ञान है. लोग चुनते हैं कि उन्हें किस बुद्धि में और किस रास्ते पर चलना है.
इस संसार की बुद्धि परमेश्वर की दृष्टि में मूर्खता क्यों है??
मूर्ख को त्याग दो, और जियो; और समझने के मार्ग पर चलो (कहावत का खेल 9:6)
इस संसार की बुद्धि परमेश्वर के लिये मूर्खता है. परन्तु परमेश्वर की बुद्धि और परमेश्वर का राज्य है दुनिया के लिए मूर्खता. परमेश्वर की बुद्धि और संसार की बुद्धि को एक साथ नहीं मिलाया जा सकता. क्योंकि वे दो अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं; आध्यात्मिक क्षेत्र (आत्मा) और प्राकृतिक क्षेत्र (माँस).

कोई व्यक्ति उतना ही अधिक होशियार हो जाता है (संसार के अनुसार मानव दैहिक ज्ञान द्वारा अपनी बुद्धि को बढ़ाकर), व्यक्ति ईश्वर और ईश्वर के राज्य के प्रति उतना ही अधिक मूर्ख बन जाता है.
बाइबल को समझना असंभव है; मानव बुद्धि के साथ परमेश्वर का वचन. आप बाइबल को केवल आत्मा के माध्यम से ही समझ और समझ सकते हैं.
इस तथ्य के कारण कि कई लोग अपनी मानवीय बुद्धि और धार्मिक अध्ययनों के माध्यम से बाइबल को समझने और समझाने की कोशिश करते हैं, बहुत से लोग, जो अपने आप को ईसाई कहते हैं, कहें कि बाइबल स्वयं का खंडन करती है या बाइबल को समझना कठिन है.
लेकिन सच तो यह है, कि आप केवल बाइबल को ही समझ सकते हैं; पवित्र आत्मा द्वारा परमेश्वर का वचन. परमेश्वर की आत्मा के बिना, बाइबल को समझना असंभव है.
समझने के रास्ते में कैसे जाएं?
इसीलिए प्रभु कहते हैं, मूर्ख को त्यागना; और दुनिया का ज्ञान. संसार के ज्ञान और बुद्धि तथा सांसारिक मनुष्य की शिक्षाओं से अपने आप को विकसित न करें. परन्तु परमेश्वर के वचन के ज्ञान और बुद्धि में अपने आप को विकसित करो; यीशु.
केवल परमेश्वर के वचन से, तुम समझ प्राप्त करोगे और बुद्धिमान बनोगे. यह समझ और ज्ञान तुम्हें देगा (शाश्वत) ज़िंदगी.
जब आप परमेश्वर के वचन के माध्यम से ज्ञान और बुद्धि प्राप्त करते हैं, तू समझ की राह पर चलेगा, और मूर्खता की राह से दूर रहेगा.
'पृथ्वी का नमक बनो'


