नीतिवचन क्या कहते हैं 3:25-26 अर्थ, अचानक आने वाले डर से न डरें, न ही दुष्टों के विनाश का, जब यह आता है. क्योंकि यहोवा तेरा भरोसा रहेगा, और उनके पांव पकड़े जाने से बचाएगा?
अचानक आने वाले डर से न डरें, न ही दुष्टों के विनाश का
अचानक आने वाले डर से न डरें, न ही दुष्टों के विनाश का, जब यह आता है। क्योंकि यहोवा तेरा भरोसा रहेगा, और तेरे पांव को पकड़े जाने से बचाएगा(कहावत का खेल 3:25-26)
बहुत सारे लोग हैं, जो डर के बंधन में रहते हैं. वे भय से प्रेरित होते हैं और भय को अपने जीवन पर नियंत्रण करने देते हैं. लेकिन बाइबिल कहती है, कि तुम्हें डरना नहीं चाहिए. आपको अपने जीवन में या अपने आस-पास होने वाली घटनाओं या भविष्य में पृथ्वी पर आने वाली घटनाओं से डरना नहीं चाहिए. अस्वीकृति की तरह, रोग, बीमारी, ताऊन, प्राकृतिक आपदाएं, हिंसा, युद्ध आदि.
यीशु ने भविष्यवाणी की थी कि ये सभी चीज़ें आएंगी और पहले ही घटित होनी चाहिए उसकी वापसी.
यहोवा तुम्हारा भरोसा रहेगा और तुम्हारे पांव को ठोकर लगने से बचाएगा
लेकिन जब आप प्यार करते हैं और यीशु का अनुसरण करें, और उसके वचनों और आज्ञाओं को मानो, और उस में बने रहो, तब तुम्हें डर नहीं लगेगा. तुम्हें डरना नहीं चाहिए, क्योंकि तुम उसमें हो. जब तक आप उसमें बने रहेंगे और उसके वचनों में बने रहेंगे, तब तक प्रभु आपका और आपका भरोसा बने रहेंगे, आप अपने जीवन में उनकी शांति का अनुभव करेंगे.
जब एक हजार तुम्हारी तरफ गिरेंगे, और तेरे दाहिनी ओर दस हज़ार; वह तुम्हारे निकट नहीं आएगा. तुम केवल दुष्टों के प्रतिफल को देखोगे और उसके साक्षी बनोगे (भजन 91:7-8).
हमेशा याद रखना, कि प्रभु का हाथ आपके जीवन पर है, और जब तक तुम उसमें बने रहोगे, आप सुरक्षित रहेंगे.
इसलिए, उस पर अपना भरोसा रखो. प्रभु को अपना निवास स्थान बनाओ, क्योंकि वही एकमात्र है जो तुम्हारे पांव को उखड़ने से बचा सकता है.
वहां कुछ भी नहीं है, और इस दुनिया में कोई नहीं, जिस पर आप भरोसा कर सकते हैं और भरोसा कर सकते हैं. यीशु ही एकमात्र ऐसा व्यक्ति है जिस पर आप भरोसा कर सकते हैं और भरोसा कर सकते हैं. क्योंकि इस संसार में परमेश्वर का वचन ही एकमात्र सत्य है.
'पृथ्वी का नमक बनो'


