राजा दाऊद को यहोवा के लिये मन्दिर बनाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई?? भगवान क्यों चाहते थे कि डेविड के बजाय सालोमो मंदिर का निर्माण करे? राजा दाऊद परमेश्वर के हृदय के अनुरूप व्यक्ति था, क्या वह नहीं था?? इसलिए आप सोचेंगे कि मन्दिर बनाने के लिए दाऊद ही सही व्यक्ति था; प्रभु का घर. डेविड अपने आप को उपयुक्त समझता था और डेविड मंदिर बनवाना चाहता था इसलिए डेविड ने मंदिर की तैयारी की. लेकिन परमेश्वर ने इस मामले में अलग तरह से सोचा और दाऊद को अपने लिए मंदिर बनाने की अनुमति नहीं दी. दाऊद को मन्दिर की तैयारी करने की अनुमति दी गई, परन्तु दाऊद को मन्दिर बनाने की अनुमति नहीं दी गई. बाइबल उस कारण के बारे में क्या कहती है जिसके कारण परमेश्वर ने दाऊद को मंदिर बनाने की अनुमति नहीं दी?
दाऊद परमेश्वर के हृदय के अनुरूप व्यक्ति था
परन्तु अब तुम्हारा राज्य कायम न रहेगा: प्रभु ने अपने मन के अनुसार एक मनुष्य ढूंढ़ा है, और यहोवा ने उसे अपनी प्रजा का प्रधान होने की आज्ञा दी है, क्योंकि जो आज्ञा यहोवा ने तुझे दी है उसका तू ने पालन नहीं किया (1 शमूएल 13:14)
और जब उसने उसे हटा दिया था, उसने दाऊद को उनका राजा बनने के लिये खड़ा किया; जिसकी उसने गवाही भी दी, और कहा, मुझे यिशै का पुत्र दाऊद मिल गया है, मेरे अपने दिल के बाद एक आदमी, जो मेरी सारी इच्छा पूरी करेगा (अधिनियमों 13:22).
दाऊद वास्तव में परमेश्वर के हृदय के अनुरूप व्यक्ति था, जिसने पूरा कियाउसकी वसीयत.
दाऊद देवदार के घर में रहता था, जबकि यहोवा की वाचा का सन्दूक तम्बू के पर्दे के नीचे था.
इसलिये दाऊद सर्वशक्तिमान यहोवा के लिये एक मन्दिर बनाना चाहता था. इस प्रकार यहोवा की वाचा का सन्दूक फिर तम्बू के पर्दों के नीचे न रहा, लेकिन एक घर में; एक मंदिर.
डेविड ने नाथन के साथ अपनी योजना साझा की. नाथन ने डेविड से कहा, कि वह वही करे जो उसके मन में हो क्योंकि वह जानता था कि परमेश्वर दाऊद के साथ है.
दाऊद की मंदिर बनाने की योजना परमेश्वर ने विफल कर दी, क्योंकि परमेश्वर ने दाऊद को उसके लिये मन्दिर बनाने की अनुमति नहीं दी
आपने सोचा होगा, परमेश्वर के लिए एक मंदिर बनाने की दाऊद की योजना एक अद्भुत पहल थी. दुर्भाग्य से, परमेश्वर के लिए एक मंदिर बनाने की दाऊद की योजना को परमेश्वर ने जल्द ही विफल कर दिया. परमेश्वर ने दाऊद को उसके लिए मंदिर बनाने की अनुमति नहीं दी.
क्योंकि वही रात, प्रभु का यह वचन नातान के पास पहुंचा: “प्रभु यों कहते हैं, तू मेरे रहने के लिये घर न बनाना: क्योंकि जिस दिन से मैं इस्राएल को ले आया उस दिन से आज तक मैं किसी घर में नहीं रहा; लेकिन एक तंबू से दूसरे तंबू में चले गए हैं, और एक तम्बू से दूसरे तम्बू तक.
जहाँ कहीं भी मैं सारे इस्राएल के साथ चला हूँ, मैंने इस्राएल के किसी न्यायाधीश से एक बात कही, जिसे मैं ने अपने लोगों को खिलाने की आज्ञा दी, कह रहा, तुम ने मेरे लिये देवदारों का घर क्यों नहीं बनाया?? इसलिये अब तू मेरे दास दाऊद से योंकहना, सेनाओं का यहोवा यों कहता है, मैं तुम्हें भेड़शाला से ले आया, भेड़ों के पीछे चलने से भी, कि तू मेरी प्रजा इस्राएल पर प्रभुता करे: और जहाँ कहीं तू गया, मैं तेरे संग रहा, और तेरे सब शत्रुओं को तेरे साम्हने से नाश किया है, और तेरा नाम पृय्वी पर के बड़े बड़े पुरूषोंके नाम के समान किया है.
और मैं अपनी प्रजा इस्राएल के लिये एक स्थान ठहराऊंगा, और उन्हें रोपेंगे, और वे अपने स्यान पर निवास करें, और अब और स्थानांतरित नहीं किया जाएगा; दुष्ट लोग उन्हें फिर न उजाड़ेंगे, जैसा कि शुरुआत में था, और उस समय से जब मैं ने न्यायियों को अपनी प्रजा इस्राएल पर अधिकार करने की आज्ञा दी. इसके अलावा मैं तेरे सभी शत्रुओं को वश में कर लूँगा. मैं तुम से यह भी कहता हूं, कि यहोवा तुम्हारे लिये घर बनाएगा.
“मैं उसका पिता बनूंगा, और वह मेरा बेटा होगा”
और यह पूरा हो जायेगा, जब तेरी आयु पूरी हो जाए, कि तुझे अपने पुरखाओं के पास जाना पड़े, कि मैं तेरे पीछे तेरे वंश को उत्पन्न करूंगा, जो तेरे पुत्रों का होगा; और मैं उसका राज्य स्थापित करूंगा. वह मेरे लिये एक घर बनायेगा, और मैं उसकी राजगद्दी को सदैव स्थिर रखूंगा. मैं उसका पिता बनूंगा, और वह मेरा पुत्र होगा: और मैं उस पर से अपनी करूणा न छीनूंगा, जैसा कि मैं ने उसे उस से ले लिया जो तेरे साम्हने था: परन्तु मैं उसे अपने घर में और अपने राज्य में सदा के लिये बसाऊंगा: और उसका सिंहासन सर्वदा स्थिर रहेगा।”
नाथन दाऊद के पास गया और उससे बातें कीं, परमेश्वर ने उसे क्या बताया था और इस दर्शन के माध्यम से उसे दिखाया था. इसके बजाय दाऊद परमेश्वर के विरुद्ध विद्रोही हो गया, दाऊद भीतर गया और यहोवा के सामने बैठ गया. दाऊद ने प्रभु परमेश्वर की स्तुति की और उसके वचनों और प्रतिज्ञा के लिए उसे धन्यवाद दिया (1 इतिवृत्त 17).
राजा दाऊद को मंदिर निर्माण की तैयारी करने की अनुमति दी गई
हालाँकि डेविड को अपना मंदिर बनाने की इजाज़त नहीं थी, दाऊद को मन्दिर की तैयारी करने की अनुमति दी गई. दाऊद ने सामग्री इकट्ठी की और अपने पुत्र सुलैमान के लिए कारीगरों की व्यवस्था की. क्योंकि सुलैमान जवान और अनुभवहीन था और मन्दिर का काम बड़ा था.
डेविड ने मंदिर का खाका दिया
राजा दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान को बुलाया, और सुलैमान को यहोवा के लिये एक भवन बनाने की आज्ञा दी, इसराइल का देवता. डेविड ने उसे खाका दिया. क्योंकि यहोवा ने दाऊद पर अपना हाथ रखकर उसे लिखित रूप से समझाया था, इस योजना के अनुसार किए जाने वाले सभी कार्य और सभी विवरण (1 इतिहास 22:6-7; 1 इतिहास 28:11-19).
दाऊद ने इस्राएल के सब प्रमुखों को अपने पुत्र सुलैमान की सहायता करने की आज्ञा दी, मंदिर निर्माण करके (1 इतिहास 22:17).
लोगों ने स्वेच्छा से यहोवा और उसके घर को दान दिया
दाऊद ने अपने प्रभु परमेश्वर के भवन के लिये अपनी सारी सामर्थ्य प्रदान की. उन्होंने सोने और चाँदी का अपना निजी खजाना दे दिया, सोने और चाँदी की सभी प्रतिभाओं के आगे, वह पहले ही पवित्र घर को दे चुका था.
दाऊद ने सभा से पूछा, जो अपने आप को यहोवा के लिये समर्पित करने और यहोवा के भवन के लिये दान देने को तैयार थे.
बहुत से लोग इच्छुक थे और उन्होंने सच्चे और निष्कलंक हृदय से प्रभु को मुफ्त में दान दिया और भेंट दी और लोगों ने आनन्द मनाया. तब उन सभों ने यहोवा परमेश्वर को धन्यवाद दिया, और सिर झुकाकर यहोवा को दण्डवत् किया (1 इतिहास 29:1-20)
दाऊद को प्रभु के लिये मन्दिर बनाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई??
परमेश्वर ने दाऊद को मन्दिर बनाने की अनुमति क्यों नहीं दी?? दाऊद को परमेश्वर के लिए मन्दिर बनाने की अनुमति क्यों नहीं दी गई?? दाऊद को परमेश्वर के लिये मन्दिर बनाने की अनुमति नहीं थी, क्योंकि दाऊद योद्धा था. दाऊद ने बड़े-बड़े युद्ध किये थे और बहुत खून बहाया था.
और दाऊद ने सुलैमान से कहा;, मेरा बेटा, जहां तक मेरा प्रश्न है, मेरे मन में यह था कि मैं अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक घर बनाऊं: परन्तु यहोवा का वचन मेरे पास पहुंचा, कह रहा, तू ने बहुत खून बहाया है, और बड़े बड़े युद्ध किये हैं: तू मेरे नाम का घर न बनाना, क्योंकि तू ने मेरे साम्हने पृय्वी पर बहुत लोहू बहाया है. देखो, तुम्हारे यहां एक पुत्र उत्पन्न होगा, जो विश्राम का पुरूष होगा; और मैं उसे चारों ओर के सब शत्रुओं से विश्राम दूंगा: क्योंकि उसका नाम सुलैमान होगा, और मैं इस्राएल को उसके दिनों में शान्ति और चैन दूंगा. वह मेरे नाम के लिये एक घर बनाएगा; और वह मेरा बेटा होगा, और मैं उसका पिता बनूँगा; और मैं उसके राज्य की राजगद्दी को इस्राएल पर सर्वदा के लिये स्थिर रखूंगा (1 इतिहास 22:7-10)
तब दाऊद राजा अपने पांवों पर खड़ा हुआ, और कहा, मेरी बात सुनो, मेरे भाइयों, और मेरे लोग: जहां तक मेरा प्रश्न है, मैं ने अपने मन में यहोवा की वाचा के सन्दूक के लिथे विश्राम का भवन बनाना चाहा, और हमारे परमेश्वर के चरणों की चौकी के लिये, और भवन की तैयारी कर ली थी: लेकिन भगवान ने मुझसे कहा, तू मेरे नाम के लिथे घर न बनाना, क्योंकि तू योद्धा है, और खून बहाया है (1 इतिहास 28:2-3)
क्या आप जानते हैं रूबेन का जन्मसिद्ध अधिकार उससे क्यों छीन लिया गया??
'मन का नमक बनोएच’



